Bajaj Auto Tax Demand 2025:- बजाज ऑटो को उत्तराखंड टैक्स अधिकारियों से बड़ा झटका लगा है। कंपनी को 34.74 करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड के साथ-साथ 3.47 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पेनल्टी भी लगाई गई है। यह कार्रवाई कंपनी द्वारा सप्लाई किए जाने वाले स्पेयर पार्ट्स के कथित गलत वर्गीकरण से जुड़ी है।
रुद्रपुर के डिप्टी कमिश्नर ने आदेश में स्पष्ट किया कि बजाज ऑटो एक ऑटोमोबाइल निर्माता है। इसलिए उसके द्वारा सप्लाई किए गए स्पेयर पार्ट्स को ‘ऑटो पार्ट्स’ श्रेणी में टैक्स किया जाना चाहिए।
अधिकारियों का कहना है कि ये पार्ट्स वाहन निर्माण में सीधे उपयोग होते हैं और विशेष रूप से कस्टमाइज किए गए हैं, इसलिए इनके लिए अलग टैक्स नियम लागू होते हैं।
बजाज ऑटो के स्पेयर पार्ट्स और उनका प्रकार
बजाज ऑटो सिर्फ वाहन निर्माण नहीं करता, बल्कि अपने ग्राहकों और डीलरों को स्पेयर पार्ट्स भी सप्लाई करता है। ये पार्ट्स वाहन की रख-रखाव, मरम्मत और प्रदर्शन के लिए बेहद जरूरी हैं।
स्पेयर पार्ट्स के मुख्य प्रकार
- इंजन पार्ट्स: सिलिंडर हेड, पिस्टन, क्रैंकशाफ्ट, वाल्व आदि।
- सस्पेंशन और ब्रेक पार्ट्स: शॉक एब्जॉर्बर, ब्रेक पैड, ब्रेक डिस्क आदि।
- इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स: बैटरी, स्टार्टिंग मोटर, लाइट्स, ECU आदि।
- बॉडी और एक्सटीरियर पार्ट्स: फेंडर, बम्पर, हेडलाइट्स, मिरर आदि।
- कंट्रोल और स्टीयरिंग पार्ट्स: स्टीयरिंग कॉलम, गियर शिफ्टर, क्लच लीवर आदि।
- सर्विस और मेंटेनेंस पार्ट्स: फिल्टर, ऑइल, कूलेंट, स्पार्क प्लग आदि।
स्पेयर पार्ट्स का सही वर्गीकरण क्यों जरूरी है
स्पेयर पार्ट्स का सही वर्गीकरण टैक्स और कस्टम नियमों के लिए जरूरी है। बजाज ऑटो का कहना है कि उनके स्पेयर पार्ट्स का वर्गीकरण HSN कोड, चैप्टर नोट्स और जनरल रूल्स ऑफ इंटरप्रिटेशन के अनुसार किया गया है। गलत वर्गीकरण होने पर टैक्स डिमांड और पेनल्टी लग सकती है, जैसा कि इस मामले में देखा गया।
Bajaj Auto Tax Demand 2025: कंपनी ने जताया विरोध
कंपनी ने इस टैक्स डिमांड को पूरी तरह खारिज कर दिया है। बजाज ऑटो का कहना है कि वह पिछले 30 वर्षों से अपने स्पेयर पार्ट्स का वर्गीकरण सही तरीके से कर रही है। कंपनी का तर्क है कि इसका वर्गीकरण ‘जनरल रूल्स ऑफ इंटरप्रिटेशन’ और संबंधित सेक्शन व चैप्टर नोट्स पर आधारित है।
इसके अलावा, एचएसएन एक्सप्लानटरी नोट्स और पूर्व न्यायिक निर्णय भी इस वर्गीकरण का समर्थन करते हैं। कंपनी ने साफ कहा कि यह टैक्स डिमांड और पेनल्टी कानूनन वैध नहीं है।
कंपनी कानूनी लड़ाई के लिए तैयार
Bajaj Auto ने साफ किया है कि वह उत्तराखंड टैक्स विभाग द्वारा जारी डिमांड को चुनौती देने के लिए कानूनी कदम उठाएगी। कंपनी का कहना है कि उनका स्पेयर पार्ट्स का वर्गीकरण हमेशा सही और नियमों के अनुसार रहा है।
कंपनी की ओर से बताया गया है कि:
- यह टैक्स डिमांड और पेनल्टी कानूनी दृष्टि से वैध नहीं है।
- बजाज ऑटो इस मामले में न्यायालय का सहारा लेकर अपनी स्थिति को साबित करेगी।
- फिलहाल, इस आदेश का कंपनी की वित्तीय स्थिति, दैनिक संचालन या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है।
- कंपनी ने निवेशकों और ग्राहकों को आश्वस्त किया कि उनका व्यवसाय सामान्य रूप से चलता रहेगा, और इस मामले से कंपनी की स्थिरता पर कोई खतरा नहीं है।
Bajaj Auto Tax Demand 2025 का शेयर मार्केट पर असर

इस खबर के सामने आने के बाद बजाज ऑटो के शेयरों में हल्की गिरावट देखी गई। बीएसई पर शेयर 0.46 प्रतिशत गिरकर 9,051 रुपये पर बंद हुए। एनएसई पर भी शेयर में इसी तरह की हल्की गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्स डिमांड और पेनल्टी की खबर आने से निवेशकों में शॉर्ट-टर्म चिंता पैदा हुई, लेकिन कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति और पिछले प्रदर्शन को देखते हुए दीर्घकालिक निवेशकों पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है।
इसके अलावा, बजाज ऑटो की मुनाफ़ा मार्जिन, टर्नओवर और पिछले वर्षों की बिक्री वृद्धि को देखकर लगता है कि कंपनी की स्थिरता पर फिलहाल कोई गंभीर खतरा नहीं है।
निष्कर्ष
बजाज ऑटो और टैक्स अधिकारियों के बीच यह मामला स्पेयर पार्ट्स के वर्गीकरण पर केंद्रित है। कंपनी ने पूरी तरह विरोध जताया है और Bajaj Auto Tax Demand 2025 को चुनौती देने के लिए कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रही है।
फिलहाल, यह डिमांड बजाज ऑटो के ऑपरेशन या वित्तीय स्थिति पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं डाल रही है। निवेशकों और ग्राहकों के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है, लेकिन कंपनी की दीर्घकालिक स्थिरता पर फिलहाल कोई खतरा नहीं है।
FAQ – Bajaj Auto Tax Demand 2025
Q1: बजाज ऑटो को क्यों टैक्स डिमांड मिली?
टैक्स अधिकारियों का कहना है कि कंपनी ने अपने स्पेयर पार्ट्स को गलत श्रेणी में रखा है। इसलिए उन्हें 34.74 करोड़ रुपये का टैक्स और 3.47 करोड़ रुपये का पेनल्टी लगाया गया है।
Q2: क्या कंपनी ने इस डिमांड को स्वीकार किया है?
नहीं, बजाज ऑटो ने पूरी तरह से इसका विरोध किया है और इसे कानूनन वैध नहीं माना है।
Q3: इसका शेयर मार्केट पर क्या असर पड़ा?
खबर के बाद बीएसई पर बजाज ऑटो के शेयर 0.46% गिरकर 9,051 रुपये पर बंद हुए।
Q4: क्या यह डिमांड कंपनी के व्यवसाय पर असर डालेगी?
कंपनी ने साफ कहा है कि इसका कोई असर उसके संचालन या वित्तीय स्थिति पर नहीं पड़ेगा।
Q5: अब आगे क्या होगा?
बजाज ऑटो इस आदेश को कानूनी तौर पर चुनौती देगा और मामला न्यायालय में तय होगा
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी और समाचार साझा करने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। निवेश निर्णय या कानूनी सलाह के लिए हमेशा योग्य विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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